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हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट, कई इलाकों में ओलावृष्टि की चेतावनी

  • हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का येलो अलर्ट जारी
  • कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर में ओलावृष्टि की संभावना
  • बारिश के बाद कई शहरों में तापमान 10 से 16 डिग्री तक गिरा

हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग ने रविवार को लाहौल-स्पीति और किन्नौर को छोड़कर राज्य के 10 जिलों में आंधी-तूफान और तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया है।

विभाग के अनुसार कई स्थानों पर 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर के कुछ इलाकों में हल्की ओलावृष्टि होने की भी संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में मौसम अभी कुछ दिन और सक्रिय बना रहेगा।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 1 जून तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रह सकते हैं और रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है। 2 जून को ऊंचाई वाले तथा मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि 3 और 4 जून को पश्चिमी विक्षोभ कुछ कमजोर पड़ सकता है, लेकिन 5 जून से एक बार फिर बारिश, तेज हवाओं और तूफान की गतिविधियां बढ़ने के संकेत हैं।

लगातार हो रही बारिश का सबसे बड़ा असर तापमान पर देखने को मिला है। प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सबसे अधिक गिरावट सुंदरनगर में रिकॉर्ड की गई, जहां 28 मई को अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस था, जो अब घटकर 20.9 डिग्री सेल्सियस रह गया है। यानी केवल दो दिनों में तापमान में 16.3 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज हुई है।

राजधानी शिमला में भी मौसम ने करवट ली है। 28 मई को यहां अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस था, जो 30 मई को घटकर 17.5 डिग्री सेल्सियस रह गया। इसी प्रकार कांगड़ा का तापमान 36.8 डिग्री से गिरकर 26.3 डिग्री, मंडी का 37 डिग्री से घटकर 22.4 डिग्री तथा कुफरी का तापमान 23.2 डिग्री से घटकर 14.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी दिन और रात के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया है। मौसम में आई इस ठंडक से लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन किसानों और बागवानों की नजर अब संभावित ओलावृष्टि पर टिकी हुई है, क्योंकि इससे फसलों और फलों को नुकसान पहुंच सकता है।